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Chemistry And It’s Scope

Chemistry is the branch of physical science which deals with the study of matter, its physical and chemical properties, its chemical composition, the physical and chemical changes which it undergoes and the energy changes that accompany these processes. All the objects in this universe are composed of matter. Most of these objects are visible but some are invisible. Why chemistry…

Types of Entrepreneurs

Entrepreneurs turn Idea into Reality. They choose their own path for this. They create jobs and contribute to the economy. According to their chosen path and manner of working, types of Risk and how they handle it, there are categories of Entrepreneurs : Innovators Hustlers Imitators Researchers Buyers Small business entrepreneurship Large company entrepreneurship Scalable startup entrepreneurship Social entrepreneurship In…

Basic Concepts of Light in Hindi (प्रकाश: मूलभूत सिद्धान्त)

प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जो हमारी आँखों को संवेदित करता है। प्रकाश स्रोत से निकलकर पहले वस्तु पर पड़ता है तथा इन वस्तुओं से लौटकर हमारी आँखों को संवेदित करके वस्तु की स्थिति का ज्ञान कराता है।जब प्रकाश किसी चिकने या चमकदार पृष्ठ पर पड़ता है तो इसक अधिकांश भाग विभिन्न दिशाओं में वापस लौट जाता है इस प्रकाश किसी पृष्ठ से टकराकर प्रकाश के वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं यदि पृष्ठ अपारदर्शक है तो इसका कुछ भाग अवशोषित हो जाता है यदि पारदर्शक है तो कुछ भाग पृष्ठ के पार निकल जाता है। चिकने व चमकदार पॉलिश किये सतह अधिकांश प्रकाश को परावर्तित कर देते हैं।प्रकाश का एक मध्यम से दूसरे मध्यम में प्रकाश करते समय, दूसरे माध्यम की सीमा पर अपने रेखीय पथ से विचलित होने की घटना का प्रकाश का अपवर्तन कहते है।जब कोई वस्तु दर्पण के सामने रखी जाती है तो वस्तु से चलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण के तल से परावर्तित होकर दर्शक की आंखों पर पड़ती हैं जिससे दर्शक को वस्तु की आकृति दिखाई देती है इस आकृति को ही वस्तु का प्रतिबिम्ब कहते है।गोलीय दर्पण किसी खोखले गोले के गोलीय पृष्ठ होते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं। उत्तल एवं अवतल दर्पण। उभरे हुए तल वाले जिसमें पॉलिश अन्दर की ओर की जाती है उत्तल दर्पण, तथा दूसरा जिसका तल दबा होता है पॉलिश बाहरी सतह पर होती है अवतल दर्पण कहते है।दो तलों से घिरा जिसके दोनों तल दो गोलों के पारदर्शक खण्ड होते हैं लेंस कहलाता है। इनका उपयोग सभी प्रकाशीय यन्त्रों जैसे : कैमरा, प्रोजेक्टर्स, टेलिस्कोप एवं सूक्ष्मदर्शी आदि में किया जाता है। ये काँच (मुख्यत:) या प्लास्टिक के बने होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। उत्तल लेंस एवं अवतल लेंस।सूर्य का प्रकाश जब किसी प्रिज्म से गुजरता है तब अपवर्तन के कारण प्रिज्म के आधार की आरे झुकने के साथ साथ विभिन्न रंगों के प्रकाश में बँट जाता है। इस प्रकार प्राप्त रंगों के समूह को वर्णक्रम (Spectrum) कहते है। इन्द्र धनुष बनने का कारण परावर्तन , पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा अपवर्तन है। इन्द्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखायी देती हैं और यह प्रात: पश्चिम में एवं सायंकाल पूर्व दिशा में ही दिखायी देती। है। जब सूर्य का प्रकाश वायुमण्डल से गुजरता है तो प्रकाश वायुमण्डल में उपस्थित कणों द्वारा विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है, इसी प्रक्रिया को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते है। शरीर का महत्वपूर्ण अंग एक कैमरे की तरह कार्य करता है। बाहरी भाग दश्ढपटल नामक कठोर अपारदर्शी झिल्ली से ढकी रहती है दश्ढपटल के पीछे उभरा हुआ भाग कार्निया कहलाता है।