Physics: Unit Measurement and Errors In Hindi (मात्रक, मापन एवं त्रुटि ) class 11th and 12th for JEE

मात्रक, मापन तथा त्रुटियाँ

क्लास 11 वीं / JEE/NEET व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए

मात्रक, मापन तथा त्रुटि

भौतिक राशियाँ किसे कहते हैं?(What are the physical quantities?)

भौतिक राशियाँ : जिसे संख्यात्मक रूप से व्यक्त किया जा सके, उसे राशि कहते हैं। जैसे वस्तु की लंबाई, वजन, संख्या आदि। वे राशियाँ जिन्हे भौतिकी के नियमों को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है, भौतिक राशियाँ कहलाती हैं। उदाहरण: लंबाई, तापमान, दाब, द्रव्यमान, समय, चाल, दूरी, संवेग आदि।

भौतिक राशियों के प्रकार :

  1. मात्रक/मापन के आधार पर :
    1. मूल राशियाँ : ये स्वतंत्र राशियाँ कहलाती हैं। इन्हें व्यक्त करने के लिए अन्य भौतिक राशियों की जरूरत नहीं होती। ये सात प्रकार की होती हैं :
      1. लंबाई(Length)
      1. समय(Time)
      1. ताप(Temperature)
      1. द्रव्यमान(Mass)
      1. विद्युत धारा(Electric Current)
      1. ज्योति तीव्रता(Luminous Intensity)
      1. पदार्थ की मात्रा(Quantity of matter)
    1. व्युत्पन्न राशियाँ: ऐसे राशियाँ जिन्हें मूल राशियों के पद मे व्यक्त किया जाता है। उदाहरण: बल, त्वरण, दाब आदि।
    1. पूरक राशियाँ: समतल कोण तथा घन कोण।
  2. दिशा व परिमाण के आधार पर:
    1. अदिश राशि(Scalar Quantities): वे राशियाँ जिनमें केवल परिमाण होती हैं कोई दिशा नहीं होती, जैसे लंबाई, द्रव्यमान, आयतन, घनत्व, ताप, शक्ति आदि।
    1. सदिश राशि(Vector Quantities): वे राशियाँ जिनमें परिमाण व दिशा दोनों होती हैं, जैसे वेग, त्वरण, बल, भार, कोणीय वेग, विद्युत तीव्रता, चुम्बकीय तीव्रता आदि।

मापन और मात्रक क्या है? (What are measurement and units?)

मापन(Measurement): भौतिक राशियों का उनके निश्चित मानक से तुलनात्मक अध्ययन को मापन कहा जाता है। मापन के लिए दो आवश्यक कारक : (i) मानक/ मात्रक (ii) परिमाण

मात्रक: भौतिक राशियों को मापने के लिए चुने गए किसी निश्चित परिमाण को मात्रक कहा जाता है। उदाहरण: बल= 25 न्यूटन।

मात्रक निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. मूल मात्रक(fundamental or base unit)
  2. व्युत्पन्न मात्रक(Derived Units)
  3. पूरक मात्रक(Suppelimentary Units)

मात्रकों की पद्धति(System of Units):

  • MKS- Meter, Kilogram, second.
  • CGS- Centimeter, Gram, second.
  • FPS- Foot, Pound, Second
  • SI-Units-

SI Units (अन्तर्राष्ट्रिय मात्रक पद्धति):

यह पद्धति 1960 से प्रारम्भ किया गया है। यह प्रणाली MKS पद्धति का सुधरा हुआ रूप है।

  • लंबाई : मूल मात्रक- मीटर (m)

प्रकाश द्वारा निर्वात में एक सेकंड के 299792458 वें समय अंतराल मे तय की गई दूरी की लंबाई 1 मीटर होती है।

  • द्रव्यमान : मूल मात्रक- किलोग्राम(kg)

फ्रांस के पेरिस में स्थित अंतर्राष्ट्रीय माप तौल ब्यूरो मे रखे प्लैटिनम इरीडीयम मिश्रधातु से बने सिलिंडर का द्रव्यमान 1 किलोग्राम के बराबर माना गया है।

  • समय : मूल मात्रक- सेकंड (s)

एक सेकंड वह अंतराल है जो सीज़ियम-133 के निम्नतम ऊर्जा के दो स्तरों के मध्य संक्रमण के विकिरण के 9192631770 आवर्त काल के बराबर है।

  • विधयुत धारा : मूल मात्रक- एम्पियर(A)

निर्वात मे एक मिटर की दूरी पर रखे दो अनंत लंबाई वाले चालकों के मध्य 2×10-7न्यूटन का बल आरोपित करता है।

  • ताप  : मूल मात्रक- केल्विन(K)

जल के त्रिकबिन्दु के ऊष्मागतिक ताप के 1/273.16 वें भाग को 1 केल्विन कहा जाता है।

  • ज्योति तीव्रता: मूल मात्रक- कैंडेला(cd)

किसी दिशा में 540×1012Hz आवृत्ती वाले स्त्रोत की ज्योति तीव्रता है जो उस दिशा मे 1/683 वॉट प्रति स्टेरेडियन की विकिरण तीव्रता का एकवर्णीय प्रकाश उत्सर्जित करता है।

  • पदार्थ की मात्रा : मूल मात्रक- मोल(mol)

किसी निकाय मे पदार्थ की वह मात्र जिसमें उतनी ही मूल अवयव होती हैं जितनी 0.012 kg कार्बन-12 मे परमाणुओं की संख्या होती है।

लंबाई के प्रयोगात्मक मात्रक

1 एंगेस्ट्रोम(Å)10-10 m
1 नैनो मीटर(nm)10-9m
1 माइक्रो मीटर(µm)10-6m
1मिलीमीटर(mm)10-3m
1 सेंटीमीटर(cm)10-2m
1 किलोमीटर(km)103m
1 टैरामीटर(Tm)1012m
1 प्रकाश वर्ष(LY)9.46×1015m ~ 1016
1 खगोलीय मात्रक(AU)1.5×1011m
1 पारसेक3.26प्रकाशवर्ष = 3.083×1018m
1 मील1760गज = 1.6km
1 फर्मी(Fm)10-15m

द्रव्यमान के प्रयोगात्मक मात्रक:

1 माइक्रोग्राम(µg)10-9kg
1 मिलीग्राम(mg)10-6kg
1 ग्राम(g)10-3kg
1 क्विंटल      100 kg = 102kg
1 मैट्रिक टन103kg
1 परमाणु द्रव्यमान मात्रक(AMU)1.66×10-27kg
1 पाउंड0.4537kg
1 चन्द्रशेखर सीमा1.4xसूर्य का द्रव्यमान = 2.8×1030kg
1 स्लग        14.59kg
1 पिको सेकंड(ps)10-12s
1 नैनो सेकंड(ns)10-9s
1 माइक्रो सेकंड(µs)10–6s
1 मिलीसेकंड(ms)10-3s
1 मिनट60s 
1 घण्टा60 मिनट = 3600s
1 दिन24घण्टा = 1440मिनट = 86400s
1 सप्ताह7 दिन
1 चन्द्र मास27.3 सौर दिन = 4 सप्ताह
1 सौर मास30या 31 दिन / 28या 29दिन फ़रवरीमें
1 वर्ष              365 दिन
लीप वर्ष366दिन
1 सौर दिन86400 सेकंड
1 शेक10-8s

दश के विभिन्न घातों के पूर्वलग्न:

उपसर्गसंकेतदश की घात
योट्टा/yottaY1024
जेट्टा/ZettaZ1021
एक्सा/exaE1018
पेटा/petaP1015
टेरा/teraT1012
गीगा/gigaG109
मेगा/megaM106
किलो/kiloK103
हेक्टो/hectorH102
डेका/decaDa101
डेसी/decid10-1
सेंटी/centic10-2
मिली/milim10-3
माइक्रो/microµ10-6
नैनो/nanoN10-9
पिको/pico p10-12
फेम्टो/femtof10-15
एट्टो/attoa10-18
जेप्टों/zeptoz10-21
योक्टोyoktoy10-24

भौतिक राशियों की विमाओं से क्या अभिप्राय है ?

भौतिक राशियों की विमाएं: भौतिक राशियों को मूल मात्रकों के रूप मे व्यक्त करने के लिए मूल मात्रकों पर लगाई जाने वाली घातों को उस भौतिक राशि की विमा कहते हैं। भौतिक राशि के दोनों ओर वर्ग कोष्ठक का प्रयोग किया जाता है। विमाएं परिमाण को नहीं दर्शाती।

लंबाई = [L]        द्रव्यमान = [M]        समय = [T]       ताप = [θ]

विद्युत धारा = [A]     ज्योति तीव्रता = [cd]      पदार्थ की मात्रा = [m/मोल]

उदाहरण :

चाल = दूरी/समय = L/T = [M0LT -1]

घनत्व =द्रव्यमान/आयतन = [M L-3 T 0]

विमाहीन राशियाँ : वे राशियाँ जिनकी विमा शून्य होती है, विमाहीन राशियाँ कहलाती है।

विमाओं का उपयोग :

  1. समीकरण सजातीय है या नहीं यह पता करने के लिए
  2. भौतिक राशियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए
  3. मात्रकों की प्रणाली परिवर्तन के लिए

मापन मे त्रुटियाँ (Errors In Measurement):

राशि के मापे गए मान व वास्तविक मान के अंतर को त्रुटि कहते हैं। त्रुटि को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता केवल नगण्य माना जा सकता है।

विभेदन(Resolution): किसी राशि का अल्पतम अंक जिसे यंत्रों द्वारा पढ़ा जा सके।

यथार्थता(Accuracy): किसी राशि का मापित मान, उसके वास्तविक मान के कितना निकट है।

परिशुद्धता(Precision): परिशुद्धता वह पद है जो किसी एक माप को उसी की अन्य मापों से निकटता प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

त्रुटियों का वर्गिकरण:

  1. त्रुटियों की प्रकृति के आधार पर
    1. क्रमबद्ध त्रुटियाँ : वे त्रुटियाँ जो किसी एक दिशा में निर्धारित होती हैं। ये निम्न कारणों से हो सकती हैं –
      1. यंत्रगत त्रुटियों के कारण
      1. कार्यविधि मे अपूर्णता के कारण
      1. व्यक्तिगत त्रुटियों के कारण
    1. यादृक्छिक त्रुटियाँ: मापन मे अनियमित रूप से होने वाली त्रुटियाँ। ये बाह्यकारकों जैसे ताप, दाब वायु की आद्रता आदि द्वारा उत्पन्न हो सकती हैं। इसे अनेक बार प्रेक्षण लेकर उनका मध्यमान ज्ञात कर कम किया जा सकता है।
    1. अल्पतमांक त्रुटियाँ : यह त्रुटि मापक यंत्र के विभेदक से सम्बद्ध होता है। इसे अधिक परिशुद्ध मापक यंत्रों का प्रयोग करके कम किया जा सकता है।
  2. मापन के गणितीय आकलन के आधार पर
    1. निरपेक्ष त्रुटि: भौतिक राशि का वास्तविक मान व मापित मान का अंतर निरपेक्ष त्रुटि कहलाती है।
    1. माध्य निरपेक्ष त्रुटि= निरपेक्ष त्रुटि मे प्रत्येक प्रेक्षणों का योग /प्रेक्षणों की संख्या
    1. आपेक्षिक या भिन्नात्मक त्रुटि: निरपेक्ष त्रुटि व राशि के मध्यमान का अनुपात आपेक्षिक त्रुटि कहलाता है।

सार्थक अंक

माप में सभी विश्वसनीय अंक तथा प्रथम संदिघ्ध अंक को सार्थक अंक कहते हैं। जैसे 236.4 मे चार सार्थक अंक हैं (2,3,6,4) जिनमें से 2,3,6 निश्चित हैं लेकिन 4 अनिश्चित है।

सार्थक अंक ज्ञात करने के नियम :

  1. सभी अशून्य अंक सार्थक अंक होते हैं।
  2. दो अशून्य अंकों के बीच स्थित सभी शून्य भी सार्थक अंक होते हैं
  3. संख्या का मान एक से कम होने पर दशमलव के बाईं तरफ तथा दाईं तरफ पीआरटीएचएम अशून्य अंक से पहले के सभी शून्य सार्थक अंक होते हैं
  4. यदि किसी संख्या मे दशमलव नहीं है तब आखिरी अशून्य अंक के दाईं तरफ के सभी शून्य सार्थक अंक नहीं होते हैं
  5. किसी संख्या मे दशमलव के बाद अंतिम अशून्य अंक के दाईं ओर के सभी शून्य सार्थक अंक होते हैं
  6. इकाई पद्धति बदलने पर सार्थक अंकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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